“नाहारं चिन्तयेत प्राज्ञो , धर्ममेकं हि चिंतयेत आहारो हि मनुष्याणां जन्मना सह जायते “

भाव :-बुद्धिमान मनुष्य भोजन की चिंता न करे केवल धर्म का ही चिंतन करे। यह निश्चय है कि मनुष्यों का […]

सच्चा बंधु कौन

“आतुरे ,व्यसने प्राप्ते ,दुर्भिक्षे शत्रुसंकटे ,राजद्वारे श्मशाने च यस्तिष्ठति स बांधव:” अर्थात :- बिमारी में, विपत्तिकाल में ,अकाल के समय […]

घर किसे कहते है !!!

” न विप्रपादोदक कर्दमेन , न वेद शास्त्रा ध्वनि गर्जितानी। स्वहा स्वधा कार विवर्जितानी श्मशान तुल्यानी गृहाणी तानी। “ अर्थात […]

महान पुरुष के लक्षण

“उदेति सविता ताम्र ताम्र एवास्तमेति च , सम्पत्तौ च विपत्तौ च महतां एक रूपताम ” भावार्थ :- जिस प्रकार से […]

सर्वोत्तम धन

“अधमा धनमिच्छन्ति धनं मानं च मध्यमा , उत्तमा मानमिच्छन्ति मानो हि महता धनं”। अर्थात :- संसार में तीन प्रकार के […]

गुरु कैसा हो

गुरवो बहव: सन्ति शिष्य वित्तापहारका: |दुर्लभ: सः गुरुर्लोके शिष्य हृत्तापहारक: || There will be many gurus in the world who […]